के. आर. एस. मूर्ति का एकाक्षर मूल संस्कृत भाषा मूल शस्त्र, पद मूल शास्त्र, शब्द मूल शास्त्र प्रसिध्ध शान्ति मन्त्र का एकाक्षर मूल शोधन.
के. आर. एस. मूर्ति का एकाक्षर मूल संस्कृत भाषा मूल शस्त्र, पद मूल शास्त्र, शब्द मूल शास्त्र
प्रसिध्ध शान्ति मन्त्र का एकाक्षर मूल शोधन.
चारित्रिक भाषा मूल शस्त्र मे सकल प्रसिध्ध संस्कृत ज्नानियोने बहुत लखे हैं.
1. पाणिनि महर्षिका "अश्टाद्यायॆ" व्याकरण् ग्रन्थ लिखे है.
1. पाणिनि महर्षिका "अश्टाद्यायॆ" व्याकरण् ग्रन्थ लिखे है.
2. अमर सिंह ऋषिका "अमर कोश": उनका सामान अर्थ पादोन का सामूहि करणका ग्रन्थ् अमर कोश मे 3990 सॊत्रोन् हैं.
3. कात्यानाय महर्षि पाणिनि महर्षिका ग्रन्थ्को वर्तिको लिखे है.
4. पताञ्जली महर्षि, पाणिनि, अमर सिह्म और कात्यायन का - अश्टाद्यायॆ और वर्तिकोन् पर महाभाष्य लिखे है.
5. पाणिनि, कात्यायन और वात्सायन का व्याकरण सामॊह् को "त्रिमुनि व्याक्यरण" नाम से प्रसिध्ध हो गया है. 6. जयादित्य महर्षि, वामन महर्षि कासिक ऋषि भाष्य लिखे है.
7. कैयात महर्षि पताञ्जलै महर्षि का महाभाष्य पर तिप्पानि लिखे है.
8. बोउध्ध पण्डित धर्मकीर्ति "रूपावतार" ग्रन्थ् भी संस्कृत व्याकरण पर है.
9. भट्टोजि दीक्षित और वरदराज भी व्याकरण शास्त्र ग्रन्थो लिखे है.
भाषा मूल शास्त्र और भाषा मूल विज्ञान पर समस्त महर्षियो के ग्रन्थ और संशोधन एक पादोन का सीमित होगया है. संस्कृत अक्षर माल मे सकल अक्षरो का अर्थ, और अक्षरोसे पद संयोजन क्रिया करण, पादोन का संयोजन विधानो शास्त्र मै संस्कृत चरित्र मे प्रथम बारी सृष्टि कर्ता हू. मेरा सृष्टि शील शास्त्र को प्रबन्धो लिखा हु. मेरा प्रबन्धो मे उदाहरण (द्वार) मूलक उल्लेख किया हु. प्रसिध्ध संस्कृत श्लोको, साहित्य, कवण, मन्त्र, देवो/ देवियन् अष्टोत्तर, सहस्रनामावळॆ, वैज्ञानिक शास्त्रो, परसिध्ध साहिति और महस्र्हियोका रामायण, महाभारथा, पुराण इत्यादि संस्कृत ज्ञान कोशो का बहुतेक पदोका विश्लेषण द्वारा मेरा "एकाक्षर मूल संस्कृत पद और भाषा शस्त्र प्रसंग करना प्रारम्भ किया हु.
संस्कृत अक्षर माल
स्वर वर्ग (Vowels)
अ(a) आ(aa) इ(i) ई(ee) उ(u) ऊ(oo) ऋ(r) ॠ(r) लृ(lr) ए(e) ऐ(ai) ओ(o) औ(au)
अनुस्वार और विसर्ग वर्ग (Anuswaara and Visarga)
अं(am) अः(aha)
व्यञ्जन वर्ग (Consonants)
क(ka) ख(kha) ग(ga) घ(gha) ङ(nga)
च(cha) छ(chha) ज(ja) झ(jha) ञ(nja)
ट(ta) ठ(tha) ड(da) ढ(dha) ण(na)
त(ta) थ(tha) द(da) ध(dha) न(na)
प(pa) फ(pha) ब(ba) भ(bha) म(ma)
य(ya) र(ra) ल(la) व(va) श(sha) ष(sha) स(sh) ह(ha)
शान्ति मन्त्र का एकाक्षर मूल विश्लेषण
अ (आगे) + व (वाहना)+ तु (आशा) = अवतु (आगे बडे; आशा )
स + ह = सह (जोड् से); सः > सह
सह (जोडसे)+ नाव (हम्सब्)+ अवतु (आगे बदना आशा) = सहनाववतु
सूचना: इस उदाहरण मे अक्षर संयोजन तनर से विश्लेषण और समझन प्रयोग से किया हु.
सह नौ भुनक्तु ।
= सह (= सः = जोड्के) + नौ (नाव) (हम् सब् ) + भुम् (भू का अनुस्वार रूप = भुञ्) + अक + तु
= हम्सब् जोड्के सकल जीवन रस स्वाद आनन्द करना आशा और आकाङ्क्ष करेङ्गे)
सूचना: इस उदाहरण मे विभाजित तन्त्रसे वाक्य > पद > एकाक्षर दिशा भोदन किया हु.
सह वीर्यं करवावहै ।
सः > सह (जोड्से)
वृ + य = विर्य) (विर्य > वीर्यं; इ > ई)
सूचना:
"वृ" मूल बीजाक्षर है
य = (दिक् + काल) = दिक्काल बीजाक्षर है.
वृ और य जोडन कार्यसे = विर्य संधी व्याकरण क्रम से रु कार से आर कार को संधि परिवर्तन होता है.
विर्य का विभक्ति परिवर्तन वीर्य; इस विभक्ति परिवर्तन "संभन्धि" रूप परिवर्तन है.
कृ > कर; कृ एक मूल बीजाक्षर है. हिन्दी भाषा मे "कर, करो, कारण, कार्य, कर्ता, कर्म इत्यादि पदो का मूल बीजाक्षर "कृ" है.
कृ बीजाक्षर एक क्रिया सूचक भाववाचक संज्ञा मूल अवतार है
व + हि > वहि > वही > वहै (बदन)
व + वहै = ववहै (जोड्सेसे बदन
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्वि षावहै ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
तेजः > जेजस्
सूचना: विसर्ग अक्षर परिवर्तन अः > से > अस, अश् और अष्; ए सब् संस्कृत व्याकरण मे संधि परिवर्तन है.
तेजस्वि (पद) जेजस् पूर्ण मनुष्य है. जेजस् पद गुण सूचक भाववाचक संज्ञा मूल अवतार है
नाव = हम्सब्
अधितम् = विद्याभास, सकल अभ्यास; अधि + त = अधीत, अधि = विविध; "त" कार्य हॊवे या भूत काल का सूचक है.
अधितम् = उच्छ विध्याभस और सकल अभ्यास
अस्तु = होनेका आशा
अधितमस्तु = उच्छ विध्याभस और सकल अभ्यास का आशा है
विद्विषावहै = वि + दविष + आवहै
द्वि = दो या बहु संख्या
विश्व = द्विः
द्वि = दो या बहु संख्या
द्विः > दविष (विसर्ग अन्त्य (विसर्गान्त) अक्षर द्विः का परिवर्तन > द्विश = एकता भाव नष्ट होना समय द्विश भाव उत्पत्ति होता है.
इस वाक्यका सारांश: आशा है: विद्याभ्यास और सकल अभ्यास सफल होना और हम्सब् एकता भाव सदा अभ्यास करना और एकत पूर्ण बहुजन संघ आयेङ्गे.
आशा है: ॐ शान्थि, शान्ति, शान्ति
Om Saha Naav[au]-Avatu |
Saha Nau Bhunaktu |
Saha Viiryam Karavaavahai |
Tejasvi Naav[au]-Adhiitam-Astu Maa Vidvissaavahai |
Om Shaantih Shaantih Shaantih ||
Saha Nau Bhunaktu |
Saha Viiryam Karavaavahai |
Tejasvi Naav[au]-Adhiitam-Astu Maa Vidvissaavahai |
Om Shaantih Shaantih Shaantih ||
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